हरियाणा में जैविक खेती करने वाले और पर्यावरण-अनुकूल उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग करने वाले किसानों की पहचान करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए दिशानिर्देश

यह नीति पत्र हरियाणा को जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर ले जाने की पुरजोर वकालत करता है। इसमें मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, कीटनाशकों से सेहत पर पड़ने वाले असर और भूजल प्रदूषण को लेकर कृषि की मौजूदा स्थिति का विवरण दिया गया है। साथ ही इसका आर्थिक पक्ष भी सामने रखा गया है — जिसमें जैविक बासमती के लिए 105% अधिक दाम मिलना और 2025 तक भारत के जैविक बाजार का 51,560 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान शामिल है। इसमें केंद्र सरकार की योजनाओं और हरियाणा की अपनी प्राकृतिक खेती योजना के जरिए मौजूदा नीतिगत ढांचे को रेखांकित किया गया है। दस राज्यों के मॉडलों के तुलनात्मक अध्ययन से कुछ ऐसे सबक मिलते हैं जिन्हें यहां भी लागू किया जा सकता है। यह पत्र छह प्रमुख स्तंभों वाले एक ढांचे का सुझाव देता है, जिसमें किसानों की पहचान, प्रमाणन (सर्टिफिकेशन), वित्तीय प्रोत्साहन, पर्यावरण के अनुकूल खाद-बीज, बाजार से जुड़ाव और डिजिटल निगरानी शामिल हैं। इसे SDG 2, 3, 6, 12, 13 और 15 से भी जोड़ा गया है।

टिकाऊ विकास लक्ष्य
समन्वय और त्वरितीकरण केंद्र
सतत विकास लक्ष्यों समन्वय और त्वरण केंद्र

हरियाणा सरकार | यूएनडीपी इंडिया के साथ साझेदारी में

हरियाणा सरकार UNDP इंडिया के साथ साझेदारी में

पता
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एसडीजीसीएसी, तीसरी मंजिल, स्वर्ण जयंती हरियाणा संस्थान वित्तीय प्रबंधन के लिए, आईपी-9, सेक्टर 3, पंचकूला, हरियाणा 134109

एसडीजीसीएसी, तीसरी मंजिल, स्वर्ण जयंती हरियाणा संस्थान वित्तीय प्रबंधन के लिए, आईपी-9, सेक्टर 3, पंचकूला, हरियाणा 134109

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